*इंसानों के जंगल में न्याय को भटकती वन आरक्षी*

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रुद्रपुर। जंगल में रहने वाले जानवरों से तो सबको डर लगता है पर जंगल की सुरक्षा में तैनात कोई अधिकारी भी विवेकहीन और जंगली हो जाए तो उसका ईलाज बेहद जरुरी हो जाता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है वन विभाग के तराई केंद्रीय वन प्रभाग, टांडा रेंज रुद्रपुर का। जँहा इस रेंज के वन दरोगा पर उनकी अधीनस्थ वन आरक्षी ने गंभीर आरोप लगाते हुए उधमसिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को गुहार लगाई है।

ऐसा नहीं कि यह गुहार आनन फानन में सीधे ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से लगाई हो, बल्कि इससे पहले निचे से ऊपर तक क्रमवार सम्बन्धित अधिकारियों से यह शिकायत की गई। जिन अधिकारियों से यह शिकायत की गई उनका जिक्र आगे करेंगे पर पहले मामला जान लें।

जानकारी के मुताबिक पीड़ित महिला वन आरक्षी को वन दरोगा पहले तो जाती सूचक शब्दों के पुकारते थे, फिर समय मानसिक उत्पीड़न भी शुरू हो गया जो बाद में छेड़ छाड़ जैसे शारीरिक शोषण तक जा पहुंचा। पीड़िता अपने शिकायती पत्र में लिखती हैं कि यह सब एक वर्ष तक चलता रहा। जब यह सब जब बर्दास्त से बाहर हो गया तो विभागीय अधिकारियों को इसकी शिकायतें करी पर कोई नतीजा नहीं निकला। पीड़िता ने सारी शिकायतों का जिक्र अपने शिकायती पत्र में किया है।

सबसे पहली शिकायत की गई टांडा रेंज के वन क्षेत्राधिकारी से। जहाँ कोई असर, कोई कार्यवाही होती नजर नहीं आई तो मायूस तो हुई पर हिम्मत न हारते हुए उच्च अधिकारी, प्रभागीय वनाधिकारी से की गई। जिसके बाद यह मामला उप प्रभागीय वनाधिकारी महोदया के संज्ञान में भी लाया गया, कोई उम्मीद न दिखने पर वन विभाग के आंतरिक आंतरिक पारिवारिक समिति के अध्यक्ष की चौखट पर भी पहुंचा।

इन सारी जगहों ने नाउम्मीद महिला वन आरक्षी जून माह की 28 तारीख को पंतनगर थाने अपनी शिकायत ले कर पहुंची। जहाँ महीने भर बाद यहाँ भी न उम्मीद होकर अगस्त माह की 6 तारीख को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उधमसिंह नगर गुहार लगाने को मजबूर हुई। अब यह इंसाफ की कितनी उम्मीदें हैं यह तो नहीं कह सकते पर इतने गंभीर आरोपों के बाद जाँच टाली जा रही है और मुकदमा अभी भी दर्ज नहीं हुआ है।


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