वर्ष 2010 में समानांतर की शुरुआत एक पाक्षिक समाचारपत्र रूप में हुई थी। समाचारपत्र ने कई बड़े मुद्दों को उठाया, जिसमें राजनीति, समाज, अर्थशास्त्र, धर्म और संस्कृति से जुड़े बहुतेरे सवाल थे जिसे मुख्य धारा की मीडिया खासकर हिंदी कभी छूने का प्रयास नहीं करती। इन मुद्दों की लोकप्रियता धीरे बड़ी और व्यापक होती गयी । पर आर्थिक कारणों के चलते समाचारपत्र लगातार नहीं चलाया जा सका ।
2019 में समानान्तर वेबसाइट के रूप में लांच हुआ, पर तकनीकी खामियों के चलते सिलसिला जारी नहीं रहा।
समानांतर अब फिर दुबारा 2021सितंबर में रिलांच हुआ और आज जिस स्वरूप में समानांतर दिख रहा है, वह रिलांच होने के बाद का है।
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