अंधविश्वास के खिलाफ रामनगर के स्कूल में आयोजित कार्यशाला में 500 लोगों ने की भागीदारी

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समाज में व्याप्त अंधविश्वासों के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाली तर्कशील सोसायटी से जुड़े साथियों ने कहा, दिनों को लेकर व्याप्त अंधविश्वास पंडितों ने इसलिए बनाए, जिससे उनकी इनकम होती रहे। कोई भी दिन अच्छा या बुरा नहीं होता, बल्कि घटनायें अच्छी व बुरी होती हैं। यही बात हम गांठ बांध लें तो हमारी सोच बदलेगी और हम वैज्ञानिक चेतना की तरफ आगे बढ़ेंगे…
कार्यक्रम की शुरुआत तर्कशील सोसायटी से जुड़े लोगों ने पानी का दिया जलाकर की। छात्रों के बीच तर्कशील सोसायटी, पंजाब से जुड़े रामकुमार ने दिखाया कि लकड़ी की मशीन में एक तरफ सादा सफेद पर्ची और दूसरी तरफ से 500 रुपए के नोट कैसे हाथ की सफाई से बाहर निकाले जाते हैं। उनके इस डेमो को देखकर सभी लोग खासकर छात्र आश्चर्यचकित हो गये।
तर्कशील सोसायटी के सा​थियों ने हाथ की सफाई के कई और नमूने दिखाकर छात्रों को बताया कि भूत क्या है, भूत जैसी कोई चीज नहीं होती। भूत मन का डर है। इसके अलावा दिनों को लेकर समाज में व्याप्त अंधविश्वास यानी ये दिन अच्छा है, ये दिन बुरा है कुछ नहीं है। हर दिन अच्छा होता है। रामकुमार ने छात्रों के बीच अपनी बात रखते हुए कहा, हमारे पंजाब में कहते हैं कि बुध मतलब शुद्ध। यानी बुध दिन अच्छा है, अब किसी का पॉकेट चोरी हो जाये तो क्या बुध का दिन अच्छा हुआ।

दिनों को लेकर व्याप्त अंधविश्वास पर उन्होंने कहा कि ये सब पंडितों ने इसलिए बनाए, जिससे उनकी इनकम होती रहे। कोई भी दिन अच्छा या बुरा नहीं होता, बल्कि घटनायें अच्छी व बुरी होती हैं। यही बात हम गांठ बांध लें तो हमारी सोच बदलेगी और हम वैज्ञानिक चेतना की तरफ आगे बढ़ेंगे।
गौरतलब है कि तर्कशील सोसायटी, पंजाब पिछले 35 सालों से अलग अलग राज्यों में लोगों के बीच जाकर जागरुकता फैलाकर लोगों की सोच को मजबूत बनाने के लिए कार्यक्रम कर रही है। साथ ही उन्होंने अपना एक अनुभव साझा करते हुए कहा कि हमने चमत्कारी बाबाओं को चुनौती दी कि यदि वह उनके सामने चमत्कार करके दिखाएंगे तो उन्हें पांच लाख रुपये का ईनाम देंगे। एक पंजाब के बाबा ने हमें चुनौती दी की हम आपकी टांग तोड़ सकते हैं, लेकिन बाद में वही बाबा पीछे से भाग निकले।

कार्यक्रम में पंजाब तर्कशील सोसायटी के रामकुमार ने अपनी जीभ से त्रिशूल आर पार करवा करके दर्शकों को हैरत में डाल दिया। उन्होंने चमत्कारी बाबाओं, ओझा-शाेखाओं को चुनौती दी कि यदि वह उनके सामने चमत्कार करके दिखाएंगे तो उन्हें पांच लाख रुपये के ईनाम दिया जायेगा। इस दौरान साइंस के कई अन्य सारे करतब भी दिखाकर छात्रों को जागरुक किया।
साइंस फॉर सोसायटी के संयोजक कैसर राणा ने इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य, स्टाफ, ग्रामीण जनता, युवा एकता मंच तथा पंजाब से आए हुए हरचंद व रामकुमार जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में वैज्ञानिक चिंतन को स्थापित करने तथा अंधविश्वासों को दूर करने के लिए साइंस फोर सोसाइटी इस तरह के प्रदर्शन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का कार्य आगे भी करती रहेगी।
इस कार्यक्रम में मंचासीन लोगों में शोभन सिंह, जगदीश सिंह, महिला एकता मंच से सरस्वती जोशी शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन साइंस फॉर सोसाइटी के प्रवक्ता ललित उप्रेती ने किया। कार्यक्रम का संयोजन साइंस फॉर सोसायटी के केसर राणा ने किया। कार्यशाला के आयोजक मंडल में शामिल केसर राणा, संजय रावत, प्रकाश भट्ट, गोपाल गोदियाल, मदन मेहता, जमन राम, मुकेश, सरस्वती, फैज़ान, सुहैल, आजम, निखलेश, प्रियंका, संस्कृति भट्ट, अस्तित्व, इदरीश अहमद ने तर्कशील सोसायटी के तकनीकी प्रयोगों में सहयोग किया। इस कार्यशाला में लगभग 500 लोग शामिल हुए। इस कार्यशाला का मीडिया पार्टनर जनज्वार था। महिला एकता मंच व युवा एकता मंच ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना सहयोग दिया।

साइंस फॉर सोसायटी रामनगर और तर्कशील सोसायटी, पंजाब के सहयोग से ग्राम थारी और राजकीय इंटर कॉलेज देवीपुरा, मालधन में चमत्कारों का वैज्ञानिक स्वरूप क्या है और समाज मै कैसे वैज्ञानिक चेतना के प्रचार व प्रसार के लिए क्या किया जाये, पर 20 जनवरी को एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।


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