
देहरादून।
आम आदमी पार्टी (आप) के उत्तराखंड संगठन में बदलाव की मांग ने जोर पकड़ लिया है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि पार्टी की प्रदेश और जिला इकाइयों के समस्त कार्यकर्ता और नेता एकजुट होकर शीर्ष नेतृत्व से संगठन को भंग करने और नए, समर्पित नेताओं के चयन की मांग कर रहे हैं।
इस मांग को उठाने वालों में वरिष्ठ नेता असगर रजा (अधिवक्ता), सहित समस्त कार्यकर्ता शामिल हैं, जो पार्टी हित में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।पार्टी सूत्रों के अनुसार, उत्तराखंड में आप का संगठन लंबे समय से निष्क्रिय और दिशाहीन स्थिति में है। 2022 में सभी इकाइयों को भंग करने के बाद से संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। इससे कार्यकर्ताओं में निराशा और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व का उदासीन रवैया और संगठन के पुनर्गठन में देरी ने पार्टी की जमीनी पकड़ को कमजोर किया है। असगर रजा जैसे नेताओं ने स्पष्ट किया कि नया नेतृत्व ऐसा हो जो पार्टी के मूल सिद्धांतों—ईमानदारी, पारदर्शिता और जनसेवा—के प्रति समर्पित हो और उत्तराखंड में आप को मजबूत करने के लिए सक्रियता से काम करे।सूत्रों के हवाले से यह भी खबर है कि कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से नाराज है, क्योंकि बार-बार मांग के बावजूद संगठन को गति देने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। नेताओं का मानना है कि मौजूदा स्थिति में संगठन को भंग कर नए सिरे से पुनर्गठन ही एकमात्र रास्ता है, जिससे पार्टी उत्तराखंड में अपनी खोई हुई साख को पुनः स्थापित कर सके।
इस मांग को लेकर असगर रजा, और अन्य कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध जताया है और शीर्ष नेतृत्व से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि शीर्ष नेतृत्व ने इस मांग को गंभीरता से नहीं लिया, तो पार्टी के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि कार्यकर्ता एकजुट होकर पार्टी हित में नया नेतृत्व चुनने की प्रक्रिया को तेज करने की मांग कर रहे हैं, ताकि उत्तराखंड में आप का संगठन फिर से सक्रिय और प्रभावी हो सके।संपर्क के लिए:असगर रजा, अधिवक्ता, वरिष्ठ नेता, भारतीय साथी न्याय संघ और आम आदमी पार्टी.