
एम बी पी जी हल्द्वानी पूर्व प्राध्यापक डॉ संतोष मिश्र अपने पूरे परिवार के साथ दिल्ली एम्स में ऑर्बो के सौजन्य से डोनर कार्ड प्राप्त कर चुके हैं।एमबीपीजी के पूर्व प्राध्यापक डॉ. सन्तोष मिश्र ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि उत्तराखंड के सभी मेडिकल कालेजों में अंगदान की व्यवस्था बनाई जाय। कुछ मेडिकल कॉलेज में नेत्रदान और देहदान की सुविधा उपलब्ध है लेकिन संपूर्ण अंगदान के लिए आधारभूत संरचना अभी मौजूद नहीं है, जिससे उत्तराखंड के इच्छुक अंगदाता अंगदान नहीं कर सकते। यदि स्थानीय स्तर पर यह व्यवस्था बना दी जाती है तो उत्तराखंड के नागरिकों को दान किए गए अंग आसानी से ट्रांसप्लांट किए जा सकते हैं।
डॉ. संतोष मिश्र ने बताया कि एम्स में दो तरीके से अंगदान किया जा सकता है। पहला, जीवित रहते अंगदान की शपथ लेकर और दूसरा, मृत्यु के उपरांत परिवार के सदस्यों की सहमति से। जीवन में कभी भी कोई भी व्यक्ति दो गवाहों की उपस्थिति में जिसमें से एक करीबी रिश्तेदार हो, अंगदान शपथ पत्र भर सकता है।

एम्स की वेबसाइट से अंगदान के लिए ऑनलाइन शपथ पत्र भरा जा सकता है। अंगदान का शपथ पत्र एम्स की वेबसाइट से डाउनलोड भी किया जा सकता है, यह प्रपत्र नि:शुल्क है। अंगदान शपथ पत्र के सही पाए जाने पर एम्स दिल्ली द्वारा ऑर्गन डोनर कार्ड प्रदान किया जाता है, एम्स की सलाह होती है कि डोनर कार्ड हर समय जेब में रखना चाहिए।