
अपने ही नाम से एग्रीमेंट कर ठग रहे ग्राहकों को
हल्द्वानी। जमीन – मकान का सपना हो या कुल जमा पूंजी को निवेश कर परिवार के भविष्य के लिए सुनहरी उम्मीदें पालना आज के दौर किसी भी आमजन के लिए आसान काम भी नहीं है। पर कुछ लोग होते ही है समाज में जो उम्मीदों को यथार्थ मान कर रिस्क ले ही लेते हैं। और ऐसे ही लोगों का फायदा उठा रहे हैं प्रॉपर्टी बेचने वाले वो दलाल जो आदमी को मौत की कगार पर खड़ा कर देते हैं।
ऐसे ही मामलों से भरी पड़ी है हल्द्वानी में गौजाजाली की एक प्रॉपर्टी। भौगोलिक स्थिति के हिसाब से यह भूमि गौजाजाली उत्तर, तहसील हल्द्वानी, जिला नैनीताल में स्थित है। जहाँ रोज बवालों की स्थिति बनी रहती है, कोई ठगा हुआ ग्राहक अपनी फंस चुकि पूंजी के लिए महीनों से चक्कर काटता हुआ दिखाई पड़ता है तो कोई मिन्नतें करता और कुछ पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाता नजर आता है। पर ठगी करने वालों की हिम्मत, कि उनके कान में जूँ तक नहीं रेंगती। न ईमान से वास्ता न दोजख का डर, जैसे क़ब्र में ठगी का जाल ओढ़े किसी नए ग्राहक के इन्जार में आँखें मुदें लेटे हों।
इस प्रॉपर्टी के ढेरों वाकियों में से एक का आंशिक जिक्र करें तो चाँद बाबू,वालिद मुन्ने निवासी उत्तर उजाला, हल्द्वानी और कई दलालों का है। पर कहानी में जिक्र सिर्फ मोहम्मद उमर, वालिद जलालुद्दीन, निवासी लाइन नंबर 1, आज़ाद नगर,वार्ड नंबर 23, हल्द्वानी का है। क्रेता चाँद बाबू ने उमर से 1000 वर्ग फिट का एक प्लॉट, 49 रूपए प्रति वर्ग फिट के हिसाब से खरीदा। जिसका एडवांस 15 लाख रूपए ऑनलाइन भुगतान कर दिया। यहीं से चाँद बाबू की जिंदगी में ग्रहण लग गया, जो ग्रहण बीते 3 सालों से उतर नहीं पा रहा है।
अब जिक्र उनका आना भी लाजमी है जो गैंग के रूप में अलग अलग कब्रों से चाँद बाबू शरीके लोगों घेरने की जुगत में बैठे रहते हैं। सबसे पहला नाम है – असलम अंसारी फिर हैं मोहम्मद उमर,मो कमर, रफीक और शाह नवाज़। ये भी राजपुरा, हल्द्वानी के किसी पूँजीपति के ऐसे प्यादे हैं जो हर तरह की राजनैतिक पार्टी में दखल रखते हैं। अब चाँद बाबू जैसे जनसामान्य ऐसे महारथियों से कैसे निपटें।
कुछ शिकायतों के चलते अब यह भूमि विकास प्राधिकरण ने सीज कर रखी है, जिसका बहाना बना कर यह गैंग कम्पाउंडेशन न भर पाने की असमर्थता जाता कर लोगों से और पैसा ऐंठ कर बचते आ रहा है।
इस छोटे भूखंड के बड़े भूस्वामियों का जिक्र हो तो करीब 100 एकड़ से ज्यादा भूभाग को उन्होंने रेरा के डर से छोटे छोटे भूखंडों में अलग अलग पूँजीपतियों बेचा हैं। इन मोहतरमा का नाम है तुलसी चौधरी है।
यदि ऐसा है तो यह महज कुछ खरीदारों के साथ लेनदेन का विवाद नहीं, बल्कि भूमि के बड़े कारोबार, नियामकीय प्रावधानों और खरीदारों के हितों से जुड़ा गंभीर मामला बन सकता है। अब बड़ा सवाल यह है कि गौजाजाली उत्तर की इस भूमि के वास्तविक स्वामित्व, भूखंडों के विभाजन, एग्रीमेंट करने वाले लोगों की भूमिका और खरीदारों से प्राप्त रकम की जांच कौन करेगा? विकास प्राधिकरण, राजस्व विभाग और पुलिस की जिम्मेदारी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएं, ताकि अपनी जीवनभर की कमाई जमीन के नाम पर गंवाने वाले लोगों को न्याय मिल सके।