लोकतंत्र और संविधान में यकीन रखने वाली जनता ‘इंडिया गठबंधन’ को मतदान करें – इंद्रेश मैखुरी

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12 अप्रैल 2024 को भाकपा(माले) राज्य सचिव कामरेड इंद्रेश मैखुरी की हल्द्वानी में हुई प्रेस वार्ता हुई, प्रेस वार्ता में वाम दल के नेता इंद्रेश ने कुछ मुख्य बिंदुओं जैसे लोकतंत्र और संविधान, महिला सुरक्षा, स्वाथ्य सुविधाएं, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, वन – पर्यावरण, राजस्व गांव, नजूल भूमि, धर्म – उन्माद और मंहगाई पर अपनी बात रखी ।

उन्होंने बिंदूवार बातें रखते हुए कहा कि एक दशक से सत्तासीन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार, देश के लोकतंत्र और संविधान के लिए गंभीर खतरा बन गयी है। इसलिए तमाम लोकतंत्र पसंद और संविधान में यकीन रखने वाले लोगों से वामपंथी पार्टियां अपील करती हैं कि उत्तराखंड में पूरी ताकत के साथ ‘इंडिया गठबंधन’ को वोट देकर इस सरकार को उखाड़ फेंकें।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के नाम पर सत्ता में आई मोदी सरकार, आज सबसे बड़ी भ्रष्टाचारी और अवैध वसूली करने वाली सरकार सिद्ध हुई है। इलेक्टोरल बॉन्ड के लेनदेन का जो आंकड़ा सामने आया है, उससे साफ है कि इसकी सबसे बड़ी लाभार्थी भाजपा रही है। यह भी साफ है कि पहले कंपनियों पर एजेंसियां छापा मारती थी और फिर वो कंपनियाँ करोड़ों के इलेक्टोरल बॉन्ड भाजपा को देती थी।

दस साल पहले मंहगाई,बेरोजगारी से लेकर तमाम सवालों का जवाब मोदी सरकार को बताया गया था। एक दशक बाद देश देख रहा है कि अच्छे दिन इस देश के लिए तबाही और बरबादी के दिन सिद्ध हुए हैं।

हर साल दो करोड़ बेरोजगारों को रोजगार देने का वायदा झूठा सिद्ध हुआ। प्रधानमंत्री जी की बहुचर्चित पकौड़ा रोजगार योजना भी मंहगाई और बुलडोजर की भेंट चढ़ गयी। कुछ साल पहले एनएसएसओ की रिपोर्ट में बताया गया था कि 45 सालों में सर्वाधिक बेरोजगारी मोदी के काल में है। हाल में आई अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन(आईएलओ) की रिपोर्ट बता रही है कि बेरोजगारों में 83 प्रतिशत हिस्सा युवाओं का है । मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी.अनंथा नागेश्वरन ने कह दिया है कि सरकार बेरोजगारी जैसे सब सवालों का हल नहीं कर सकती !

अग्निवीर-अग्निपथ जैसी योजना लाकर न केवल फौज को अस्थायी कर दिया गया है बल्कि यह अन्य को भी संदेश है कि जब सबसे बड़ी नौकरी अस्थायी हो सकती है तो फिर बाकी नौकरियाँ स्थायी कैसे होंगी ! पुरानी पेंशन स्कीम (ओपीएस) की मांग कर रहे कर्मचारियों को भी परोक्ष रूप से बता दिया गया है कि सेना में पेंशन खत्म तो उन्हें पेंशन कैसे मिलेगी ? कुल मिलाकर यह स्थायी नौकरियों के खात्मे और देश की सुरक्षा से खिलवाड़ की योजना है ।

एमएसपी और फसलों का लागत मूल्य को लेकर संघर्ष कर रहे किसानों की राह में कीलें बिछाई गयी, आँसू गैस और गोलियां चलायी गयी और उन्हें आतंकवादी और खालिस्तानी तक कहा गया । लंबे संघर्षों से हासिल मजदूरों के 44 श्रम क़ानूनों को खत्म करके चार श्रम कोड (लेबर कोड) लाकर मजदूरों को पूंजीपतियों का बंधुआ बनाने का इंतजाम कर दिया गया है ।
आशा-आंगनबाड़ी-भोजनमाता जैसे स्कीम वर्कर्स के लिए न न्यूनतम वेतन है,ना सरकारी कर्मचारी का दर्जा ।

महिला सुरक्षा की बड़ी-बड़ी बातें हुई, बेटी बचाओ का नारा भी दिया गया, लेकिन इस एक दशक में महिलाएं सर्वाधिक हमलों और हिंसा की शिकार हुई । कठुआ, उन्नाव, हाथरस से लेकर उत्तराखंड में अंकिता भण्डारी के प्रकरण तक इस बात के उदाहरण हैं कि भाजपा हमेशा बेटियों के उत्पीड़कों के साथ खड़ी रही है । अंकिता भण्डारी केस के वीआईपी का तो अब तक कोई पता नहीं है और सरकार इस मामले में मुंह खोलने को तैयार नहीं है ।

उत्तराखंड में डबल इंजन,डबल तबाही का सबब बना । नौकरियों की लूट, जल-जंगल-जमीन जैसे संसाधनों की लूट और जीवन की लूट ही बीते सात वर्षों में उत्तराखंड के हिस्से आई है. स्कूल बंद हो रहे हैं और सरकारी अस्पताल सिर्फ रेफरल सेंटर बने हुए हैं ।

धर्म के नाम पर उन्माद और उत्पात करने वालों को सरकारी संरक्षण हासिल है। दलित उत्पीड़न की घटनाएँ निरंतर बढ़ी हैं । चक्की छूने, कुर्सी पर बैठने से लेकर अंतरजातीय विवाह करने तक के लिए दलितों की हत्याओं का एक सिलसिला है । ऐसे मामलों में राज्य सरकार खामोशी बरते रहती है । 01 सितंबर 2022 को अल्मोड़ा जिले में हुआ जगदीश हत्याकांड इसका उदाहरण है । मुख्यमंत्री ना तो पीड़ित परिवार से मिले ना ही किसी मुआवजे की घोषणा की ।

अतिक्रमण हटाने के नाम पर गरीबों को उजाड़ने का खेल भाजपा राज में लगातार खेला गया । वनों और खत्तों में रहने वाले लोगों से लेकर शहरों में नजूल जमीन पर बसने वाले तथा अन्य शहरी गरीबों को निरंतर उजाड़ने की कोशिश हो रही है । ऐसे अभियानों को सांप्रदायिक रंग दे कर अल्पसंख्यकों के विरुद्ध घृणा को गरीबों को उजाड़ने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है ।

दशकों से वनों में रहने वालों या शहरों में नजूल की जमीन पर काबिज लोगों को अतिक्रमण के नाम पर उजाड़ने का अभियान उत्तराखंड में चल रहा है। अतिक्रमण हटाने के नाम पर चलने वाला बुलडोजर शुरू में अल्पसंख्यकों के विरुद्ध चलता है और अन्य लोगों की घृणा को भी तुष्ट करता चलता है लेकिन मूल रूप से यह अभियान गरीब विरोधी है और गरीबों को उजाड़ना ही इसका मकसद है। बिंदुखत्ता में लोगों दशकों से राजस्व गांव की मांग को लेकर संघर्षरत हैं, भाजपा ने भी उनकी मांग पूरा करने का वायदा किया था लेकिन अब भाजपा सरकार बिंदुखत्ता को भी अतिक्रमणकारी बता कर उजाड़ने का मंसूबा बांध रही है। इसके साथ ही बागजाला, हल्द्वानी, बाजपुर, रुद्रपुर, वन खत्तों, गुर्जरों सभी जगहों में गरीबों को उजाड़ने पर ये सरकार आमादा है। जबकि जरूरत तो सभी वनवासियों, खत्तावासियों, ग्रामीण एवं शहरी गरीबों को जो जहां है वहां का मालिकाना अधिकार दिए जाने की है लेकिन इसके लिए भाजपाई बुलडोजर सरकार की विदाई बहुत जरूरी है।

विनाशकारी विकास के मॉडल की मार जोशीमठ बीते एक साल से अधिक समय से झेल रहा है । लंबे आंदोलन के बावजूद जोशीमठ के पुनर्वास, पुनर्निर्माण और स्थिरीकरण के लिए कोई ठोस प्रयास सरकार नहीं किया । सड़क,रेल निर्माण आदि तमाम कामों में प्रकृति पर्यावरण और परिस्थितिकी के विनाश को अंजाम दिया जा रहा है, जिससे उत्तराखंड के हिस्से सिर्फ तबाही आ रही है ।

ऐसे समय में जब लोकसभा चुनाव हो रहा है तब यह वर्तमान भाजपा सांसद श्री अजय भट्ट के पांच साल के कामकाज की समीक्षा का वक्त भी है। नैनीताल – उधमसिंहनगर के सांसद को भाजपा ने दोबारा टिकट दिया है, उनकी हालत यह है कि वे अपनी सांसद निधि का बड़ा हिस्सा तक नहीं खर्च कर सके। वे केंद्र सरकार में रक्षा राज्य मंत्री थे लेकिन अग्निपथ – अग्निवीर योजना जो कि देश की सुरक्षा और नौजवानों के रोजगार दोनों के साथ छलावा करती है, उस पर एक विरोध का शब्द तक नहीं बोल सके। उनके पिछले पांच साल की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड जीरो रहा है।

हम अपील करते हैं कि जाति-धर्म, धनबल-बाहुबल के प्रभाव से ऊपर उठ कर जनता के जीवन के असल मसलों पर लोग वोट करें और इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों को विजयी बनायें ।

प्रेस वार्ता में राज्य सचिव कामरेड इंद्रेश मैखुरी के साथ माले नैनीताल जिला सचिव डा कैलाश पाण्डेय, राज्य कमेटी सदस्य के के बोरा, बहादुर सिंह जंगी, विमला रौथाण, मदन मोहन चमोली, धीरज कुमार शामिल रहे।


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