
संजय रावत
संवैधानिक तौर पर यूँ तो सभी को अभिव्यक्ति की आजादी मिली है पर इस आजादी की सीमा वहां समाप्त हो जाती है जहाँ से अनर्गल बातें अपना आकर बढ़ाने लगती हैं। ऐसा ही कुछ हुआ फेसबुक पर चलने वाले एक पेज का जिसका नाम है हल्द्वानी ऑनलाइन ग्रुप 2011, इस ग्रुप के संचालक यूँ तो हार्डवेयर की दुकान चलाते हैं नाम है अमित खोलिया। अमित खोलिया ने यह ग्रुप उस दौर में शुरू किया जब डिजिटल मिडिया अस्तित्व में आया ही था, आज इसके फॉलोअर की संख्या करीब तीन लाख के आसपास है।
इतनी फॉलोशिप के चलते इनका रसूक प्रसाशनिक अधिकारियों के बीच इतना बढ़ गया कि ये सांठ गाँठ की स्थिति तक पहुँच गए। ये रोज नए कारनामों को अंजाम देते, किसी को फर्जी कहते तो किसी को धमका भी लेते, जोरदार बात यह होती कि इनके खिलाफ कोई शिकायत जाती तो कप्तान स्तर के अधिकारी इनकी सिफारिश को आगे आजाते।.

इनके हौसले का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अभी कुछ समय पहले हि ये अपने बीमार दिल की रिपेयरिंन करा कर आए और फिर एक नया गुल खिला दिया, पर इस बार कोई इन पर इतना भारी पड़ गया कि इन्हें ये ग्रुप ही डीएक्टिवेट करना पड़ गया। हुआ यूं कि अपने ग्रुप हैंडिल से इन्होंने एक महिला के संस्थान और उसकी प्रमाणिकता पर ही सवाल नहीं खडे किए बल्कि उसके कार्य संचालन को ही फर्जी करार घोषित कर दिया।
फिर होना क्या था कि उक्त महिला ने अपने प्रमाण पत्रों के साथ इनकी पोस्ट का सक्रिन शॉर्ट दिखा कर सायबर सेल में प्राथमिकी दर्ज करा दी। साथ ही साथ इसकी प्रति सी.एम. पोर्टल, कुमाऊं कमिश्नर, एस एस पी नैनीताल आदि को प्रेषित कर दी है तब से यह ग्रुप डीएक्टिव चल रहा है। यहाँ सोचने वाली बात यह है कि कोई हार्ड वेयर का व्यापारी जिन तीन लाख लोगों की भावनाओं को दरकिनार कर ऐसे खेल खेलता हो तो इसके साथ पुलिस को गहन जाँच करनी ही चाहिए। ज्ञात हुआ है कि इस व्यापारी ने अब नया ग्रुप बना डाला है।