मूक सहमती से हो रहे अवैध निर्माण

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हल्द्वानी। जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण और नगरनिगम अपने कर्तव्यों के प्रति जैसा जुझारूपन दिखा रहे हैं उससे लगता है कि वे एक रोमोर्ट गैजीट की भूमिका निभा रहे है बस। इसके हालिया उदाहरणों पर नजर डालें तो सब कुछ साफ नज़र आने लगेगा, मसलन बीते पख़वाड़े किसी शिकायत के बिना ही शहर की एक भवन के ऊपर निकली दो दो फीट के पिलर गिराने विकास प्राधिकरण और नगरनिगम की टीम पहुँचती है और सब कुछ नेस्तनाबूत कर देती है और दूसरी तरफ नजूल पर निर्माणाधीन तीन मंजिली ईमारत के अवैध निर्माण को अनदेखा कर देती है। यह विवेक का सवाल है, कर्त्तव्यपरायणता का या किसी अनदेखी चालक शक्ति का, यह अभी किसी धुंध में खोई रौशनी तलाशने जैसा है।

चर्चा है कि हल्द्वानी में रामपुर रोड में सिंधी चौराहे पर होली ग्राउंड के समीप नजूल भूमि पर तीन मंजिली ईमारत का निर्माण बेरोक टोक के चल रहा है। इस अवैध निर्माण को नगरनिगम और जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण की मूक सहमती हांसिल है।ईमारत का निर्माण करने वाले शहर के पुराने, प्रतिष्ठित और पूँजीपति हैं। इनके प्रतिष्ठान का नाम भुखनलाल स्विट्स है। नजूल की भूमि पर निर्माण कार्य, वो भी किसी राजकीय आज्ञा के, बिना नक़्शे के, मानकों की खुली अवहेलना करते हुए करना हैरत में ही नहीं डालता बल्कि और कई गंभीर सवाल खडे करता है।

सवाल और ज्यादा गंभीर इसलिए हैं कि यह निर्माण एक दिन में नहीं हुआ, रातों रात नहीं हुआ जो पता ही नहीं चल पाया हो। इस मामले की लिखित शिकायत भी किसी ने विकास प्राधिकरण और नगरनिगम को की है पर निर्माण कार्य प्रगति पर है। माना सड़क चौड़ीकरण में किसी की ज़मीन चले भी जाती है है तो वहां बची हुई जमीन पर पक्का निर्माण तो नहीं किया जा सकता है। क्यूंकि पक्के निर्माण के लिए ही विकास प्राधिकरण का गठन हुआ है, जो निर्माणकर्ता को बताता है कि पक्के निर्माण के लिए सरकार ने कुछ नियम मानक तय किए हैं जिनकी अवहेलना करना अपराध होगा। यदि नियम मानकों की अवहेलना हुई तो ईमारत सीज ही नहीं होगी बल्कि नियमों के हिसाब से ध्वस्त भी की जा सकती है।

किसी भी व्यवसायिक ईमारत के निर्माण के लिए कई ठोस मानक हैं, मसलन तीन मंजिली ईमारत निर्माण के लिए आगे कितने मीटर की सड़क होनी चाहिए, आगे और अन्य दिशा में कितने मीटर का सैटबैक होना चाहिए, आगे की तरफ कितने मीटर बाइंडिंग एरिया छोड़ना होगा। यही नहीं, किन किन विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र हांसिल करने होंगे आदि आदि यह भी मनकों में शामिल है। मानकों का व्योरा सम्बन्धित अधिकारियों से मुलाक़ात के बाद ही प्रकाशित करना उचित होगा पर यह निर्माणाधीन अवैध ईमारत चर्चा और शासकीय कार्यप्रणाली पर सवाल खडे करती है। आगे उनका और सम्बन्धित अधिकारियों पक्ष जानने के बाद…

इस मामले पर हमने उक्त भूस्वामी अनिल गुप्ता से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क साधने की कोशिश की पर उनका सेल फोन लगातार स्विच ऑफ का एलान कर रहा था। हमने उनके दूसरे नंबर पर बात करनी चाही तो कहा गया कि वे नहीं हैं जिसके बाद उनका फोन ही नहीं उठा।


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